मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले 9वें आम बजट को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार से किसानों और गांवों के लिए ठोस प्रावधान करने की मांग की है।मुजफ्फरनगर के जाट कॉलोनी स्थित अपने आवास से मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि बजट के नाम पर सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि कृषि और गांव का वास्तविक बजट भी सामने आना चाहिए, क्योंकि सरकार के लिए कृषि और गांव दोनों एक ही हैं।

उन्होंने कहा कि गांव में रहने वाला मजदूर, पशुपालक, दूध किसान और मछली पालक सभी को बजट का सीधा लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार को इन क्षेत्रों की मॉनिटरिंग कर उचित दाम सुनिश्चित करने होंगे। टिकैत ने कहा कि जमीनों के सर्किल रेट लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फसलों के दाम वर्षों से जस के तस हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर सरकार से लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन यह बजट का विषय नहीं बल्कि कानून का मुद्दा बन चुका है।
राकेश टिकैत ने कहा कि अगर बजट में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाया जाए तो इसका लाभ सब्सिडी के रूप में किसानों को मिलेगा, चाहे वह स्वास्थ्य हो या शिक्षा। उन्होंने सभी ट्रैक्टरों पर छूट, बिजली दरों में राहत और सोलर पैनल पर अधिक सब्सिडी देने की मांग की। टिकैत ने कहा कि अगर देश को ऊर्जा की बचत करनी है तो सोलर पैनल पर सब्सिडी बढ़ानी होगी। वर्तमान में सरकार 3 किलोवाट तक ही सब्सिडी दे रही है, जबकि किसानों को 10 किलोवाट तक के सोलर पैनल पर भी छूट मिलनी चाहिए।उन्होंने बताया कि हरियाणा और पंजाब में खेतों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, उसी तरह उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट क्षेत्र में भी किसानों को सोलर पैनल लगाने का लाभ मिलना चाहिए। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जलभराव से फसलें खराब हो जाती हैं, लेकिन बीमा योजना में इसका पूरा मुआवजा नहीं मिल पाता।
राकेश टिकैत ने पहाड़ी राज्यों के किसानों की समस्याओं पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वहां बागवानी क्षेत्र में सड़क निर्माण के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है, ट्रकों की आवाजाही बंद रहने से उपज खराब हो रही है। हिमाचल और उत्तराखंड के किसानों के पलायन को रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों की फसल को मंडी तक पहुंचाने की व्यवस्था करे, जिससे पलायन रुके। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा नहीं मिला तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।





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