October 5, 2026

HULCHUL INDIA 24X7

बेबाक खबर तेज असर

हैदरपुर वेटलैंड की जलकुंभी से उत्पाद बनाकर महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर दिल्ली की संस्था सिखाएगी जलकुंभी से टोकरी बैग व चप्पल बनाना

हैदरपुर वेटलैंड की जलकुंभी से उत्पाद बनाकर महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर दिल्ली की संस्था सिखाएगी जलकुंभी से टोकरी बैग व चप्पल बनाना

हैदरपुर वेटलैंड की जलकुंभी से उत्पाद बनाकर महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर दिल्ली की संस्था सिखाएगी जलकुंभी से टोकरी बैग व चप्पल बनाना

मीरापुर – रामसर साइट के रूप में विश्व विख्यात हैदरपुर वेटलैंड अब केवल पर्यावरण और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि गंगा के निकटवर्ती गांवों की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। जिला प्रशासन ने दिल्ली की एक प्रमुख संस्था के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। इसके तहत, दिल्ली की संस्था हैदरपुर वेटलैंड के पानी में दूर तक फैली जलकुंभी (वाटर हाइसिंथ) का उपयोग कर महिलाओं को टोकरी, बैग, चप्पल और अन्य सजावटी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देगी। यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार देगी, बल्कि वेटलैंड को जलकुंभी से मुक्त कर जलीय जीवों और प्रवासी पक्षियों के लिए भी अनुकूल माहौल बनाएगी मुजफ्फरनगर के हैदरपुर वेटलैंड की समृद्ध जैव विविधता अब आसपास के गांवों के लिए एक वरदान साबित होने जा रही है। वेटलैंड में पानी के ऊपर तेजी से फैलने वाली जलकुंभी, जिसे अक्सर एक समस्या माना जाता है, उसका सदुपयोग करने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) उमेश मिश्रा ने एक शानदार और दूरदर्शी पहल की है। रविवार को डीएम उमेश मिश्रा ने हैदरपुर वेटलैंड पहुंचकर दिल्ली की ‘इको रूट्स’ संस्था की प्रतिनिधि अपर्णा तिवारी के साथ विस्तृत वार्ता की। इस दौरान संस्था की अधिकारी ने बताया कि उनकी संस्था भारत के पांच राज्यों में पहले से ही बेकार समझी जाने वाली इस जलकुंभी से अलग-अलग इको-फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) उत्पाद बनाकर महिलाओं और पुरुषों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। अब यही सफल मॉडल मुजफ्फरनगर में भी लागू किया जाएगा इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा के बारे में जानकारी देते हुए एसडीएम जानसठ रश्मि लांबा ने बताया कि गंगा के निकटवर्ती गांवों में सक्रिय स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा। संस्था के विशेषज्ञों द्वारा गांव की महिलाओं को मास्टर ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे जलकुंभी से बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद बनाना सीख सकें। एसडीएम ने बताया कि महिलाओं को अपना काम शुरू करने में कोई आर्थिक परेशानी न आए, इसके लिए प्रशासन द्वारा उन्हें ब्याज मुक्त ऋण (लोन) तथा आवश्यक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भविष्य में इन तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए उचित बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। संस्था की प्रतिनिधि अपर्णा तिवारी ने बताया कि जलकुंभी को पानी से निकालकर पहले एक विशेष प्रक्रिया के तहत सुखाया जाता है। इसके बाद इसके रेशों का इस्तेमाल कर बेहद मजबूत और खूबसूरत टोकरी, कैरी बैग, चप्पल, मैट और कई अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जलकुंभी का यह सदुपयोग न केवल महिलाओं के लिए एक अच्छी आय का साधन बन रहा है, बल्कि इससे हैदरपुर वेटलैंड के पानी को भी साफ रखने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे सर्दियों में यहां आने वाले विदेशी पक्षियों को और अधिक बेहतर प्राकृतिक आवास मिल सकेगा। प्रशासन की इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है।

About The Author

error: Content is protected !!