द्रौपदी, कुंती और उत्तरा ने भगवान को अपना सर्वस्व माना : साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी
मुजफ्फरनगर, 4 अक्टूबर 2026। ग्राम जलालपुर स्थित श्री पितृदेव स्थान – सिंघल परिवार में पितरों के निमित्त आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को कुंती स्तुति एवं भीष्म स्तुति का वर्णन हुआ। कथाव्यास परम पूज्या साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी (श्री राम कृपा धाम, हरिद्वार) ने इन प्रसंगों के माध्यम से भगवान के प्रति विश्वास और समर्पण का महत्व बताया।

साध्वी जी ने बताया कि द्रौपदी, कुंती और उत्तरा ने श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व माना। जीवन में जब भी विपत्ति आई, उन्होंने अपनी रक्षा के लिए भगवान को पुकारा। इन प्रसंगों में भगवान के प्रति उनकी अटूट आस्था और पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट होता है।
भीष्म पितामह के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण उनके अंतिम समय में दर्शन देने के लिए कुरुक्षेत्र पहुँचे। भगवान का दर्शन करते हुए भीष्म पितामह ने देह त्यागी। साध्वी जी ने भीष्म, युधिष्ठिर और परीक्षित के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए श्रीमद्भागवत में भक्त और भगवान के संबंध का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में परम सत्य का ध्यान और परम धर्म का वर्णन है। यह धर्म मनुष्य को अपने जीवन के कर्तव्यों का पालन करते हुए श्रीकृष्ण में मन लगाने का मार्ग दिखाता है।

प्रमुख रूप से आज श्री सतीश गोयल जी (टिहरी स्टील्स), श्री रमेश चंद सिंघल जी, श्री अमरीश कुमार सिंघल जी (सुमेरचन्द स्टील्स), श्री संजीव सिंघल जी (सिंघल स्टील्स), श्री गणपति खाटूश्याम मंदिर, श्याम पधारे म्हारे गांव, एवं श्री हरिनाम संकीर्तन मंडल के समस्त भक्तगण कथा में पधारे और देवी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
समस्त सिंघल परिवार द्वारा आयोजित ‘पितृकृपा’ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता को समर्पित है। श्रीहरि की कथा के माध्यम से पूर्वजों से मिले संस्कारों को सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना इस आयोजन का मूल भाव है।




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