April 18, 2026

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महिला संसद के साथ दिल्ली की सीमाओं पर जारी रहेगा प्रदर्शन

देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर किसानों का धरना ‘महिला संसद’ के आयोजन के साथ ही सोमवार शाम को समाप्त हो गया. हालांकि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ नौ महीने पहले शुरू हुआ किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर जारी रहेगा. महिला संसद सत्र के दौरान 200 किसान महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों पर चर्चा की.
किसान एकता मोर्चा के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर जारी एक वीडियो क्लिप में किसान नेता बूटा सिंह शादीपुर ने कहा कि आज महिलाओं ने व्यवस्थित तरीके से किसान संसद का संचालन किया. महिलाओं ने बताया कि इन काले कानूनों में काला क्या है और किसान संसद में अपनी चिंताओं को उठाया.उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए और जल्द से जल्द तीन कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए. साथ ही कहा कि जब तक ये कानून रद्द नहीं होते, तब तक हम वापस नहीं जाएंगे.

अगली रणनीति पर किसानों ने काम करना किया शुरू

वहीं नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त दीपक यादव ने कहा कि सभी प्रदर्शनकारी किसानों ने जंतर-मंतर स्थल को खाली कर दिया है. इस बीच किसान संसद के समापन के साथ ही किसानों ने अगली रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन का आज हमारा अंतिम दिन था. हमने 15 अगस्त को देशभर में तिरंगा रैली निकालने की योजना बनाई है.किसानों ने बीजेपी सरकार के इस्तीफे की मांग करते हुए अपनी ‘किसान संसद’ में सरकार के खिलाफ एक ‘अविश्वास प्रस्ताव’ भी पारित किया. दिल्ली पुलिस ने किसानों को जंतर-मंतर पर 22 जुलाई से नौ अगस्त तक अधिकतम 200 लोगों के साथ प्रदर्शन करने की अनुमति दी थी. विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर सैकड़ों किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. सरकार किसान नेताओं के साथ 11 दौर की औपचारिक वार्ता कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

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