April 30, 2026

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पुरक़ाज़ी में शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई ईद-उल-फ़ितर की नमाज़, भाईचारे की बनी मिसाल

✨ पुरक़ाज़ी में शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई ईद-उल-फ़ितर की नमाज़, भाईचारे की बनी मिसाल ✨

✨ पुरक़ाज़ी में शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई ईद-उल-फ़ितर की नमाज़, भाईचारे की बनी मिसाल ✨

जनपद मुज़फ़्फ़रनगर के क़स्बा पुरक़ाज़ी में ईद-उल-फ़ितर का पावन त्योहार इस वर्ष आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश करते हुए पूरी शांति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
ईद से पूर्व चांद रात के मौक़े पर क़स्बे के बाज़ारों—विशेषकर न्यू मार्केट रज़ा कॉम्प्लेक्स—में महिला-पुरुष खरीदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। गली-मोहल्लों और चौराहों पर रौनक का माहौल रहा।
पूरे क़स्बे एवं आसपास के क्षेत्रों में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जिससे हर ओर खुशी, सुकून और अमन का माहौल बना रहा।
इस अवसर पर समाजसेवी रहे स्वर्गीय डॉ. शिवकुमार वल्लभ के सुपुत्र डॉ. आदित्य कुमार वल्लभ ने इंसानियत और एकता की मिसाल पेश करते हुए मुस्लिम भाइयों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी, अपने आवास पर आमंत्रित कर सभी का मीठा मुंह कराया तथा पान खिलाकर प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। यह दृश्य लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
छोटे दरबार के सामने शाही जामा मस्जिद में सुबह 7:30 बजे इमाम हाफ़िज़ अब्दुल अज़ीज़ अंसारी ने नमाज़ अदा कराई।
ईदगाह में सुबह 8:00 बजे शहर क़ाज़ी मुफ़्ती तनमीक़ अहमद ने नमाज़ अदा कराई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
लक्सर रोड स्थित आमना मस्जिद में इमाम शान मोहम्मद ने सुबह 8:15 बजे नमाज़ अदा कराई।
मेंन बाज़ार मरकज़ वाली जामा मस्जिद में सुबह 8:30 बजे अंतिम नमाज़ अदा की गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व गृह राज्य मंत्री/पूर्व सांसद सईदुज़्ज़मां, उनके पुत्र सलमान सईद, पूर्व चेयरमैन नसीम, उनके पुत्र मुनीर सईद, तथा पुरक़ाज़ी चेयरमैन ज़हीर फ़ारूकी, समाजसेवी एवं आरएलडी नेता बशारत खान लताफ़त सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक साथ नमाज़ अदा कर एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।
नमाज़ के उपरांत शहर क़ाज़ी द्वारा देश में शांति, भाईचारा और तरक़्क़ी के लिए विशेष दुआ कराई गई।
पुरकाज़ी एवं आसपास क्षेत्र में इस वर्ष की ईद-उल-फ़ितर ने यह साबित कर दिया कि जब दिल मिलते हैं, तभी मोहब्बतों के फूल खिलते हैं। हर त्योहार किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होता है—और यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।

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